PEOPLE – आत्मा से परमात्मा तक !

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Hornbill Festival 2018

नागालैंड के हॉर्नबिल फ़ेस्टिवल में एक दिन | नॉर्थईस्ट भारत से पहली मुलाकात | भाग – 2

सारे परफॉर्मेंसेज़ देख कर हमको आख़िरकार वो चीज़ समझ आती है जिसके लिए नागा लोगों का यह परफॉर्मेंस होता है. परफॉर्मेंसेज़ का टॉपिक इतना सीरियस होते हुए भी सब मजाकिया तौर पर हो रहा होता है. नकली गन, नकली गोली और मारना मरना सब नकली। हालाँकि इसी परफॉर्मेंस के थ्रू ये लोग युद्ध के मैदान में होने वाले नुकसान को दिखाते हैं. यही इस परफॉर्मेंस का मकसद होता है. असल वॉर की एक पैरोडी करके ये लोग ह्यूमंस की लड़ाई वाली मानसिकता पर गहरी चोट करते हैं. बेशक इन लोगों में इस बात की समझ पर्सनल एक्सपीरियंस के बाद आयी हो, पर दर्शकों को अपनी पर्फोमन्स से इस बात पर सोचने को मजबूर करते हैं.

Bodoland Territorial Region

Bodoland: An Epitome of Human Persistence

We got to know and experience the raw stories and unadulterated beauty of Bodoland, thanks to the Ambassadors of Bodoland program by Bodoland Tourism. We were hosted by Rootbridge Foundation on this 8-day extravaganza in ever-awesome Assam! Apart from the other stories that we had gathered, we also got to have some sense of what(s), why(s) and a couple of other questions! Let’s begin!

Bawray Banjaray on Hampta Pass Trek

15 अगस्त वाली ट्रिप – ट्रिपिंग इन टू द हिल्ज़ ऑफ़ इंडियन हिमालय | भाग – 11

कोरोना के होने से पहले ही हमने क्वारंटाइन लाइफ कैसी होती है, इसका टीज़र देख लिया था. हमें तब पता नहीं था कि इसे ‘क्वारंटाइन होना’ कहेंगे। हमप्ता के बालू घेरा बेस कैंप पर पचपन घंटे बारिश में फंसने के बाद अपना झोला उठाकर वापिस मनाली के लिए निकल लिए।

Yogesh Sarkar was the founder of BCMTouring

Yogesh Bhai – I Will Not Miss You!

Yogesh Sarkar, the founder of BCMTouring breathed last at Pangong on his tenth trip to Ladakh. Although there is this deep void that is lurking around, I can only hope he had wished his last breaths in these mountains and that he had his wish fulfilled before he left for the eternal journey.

Chacha Chachi With BAwray Banjaray

Chaacha – Chaachi Of Spiti Valley | बोध दोरजी और उनकी धर्मपत्नी चंद्रा

हम बात कर रहे हैं बातल के चंद्रा ढाबा के मालिक और स्पिति जाने वाले यायावरों के चहेते – चाचा बोध दोरजी और उनकी धर्मपत्नी चंद्रा की। हम 4 लोगों ने मिल के खूब अंडे और परांठे पेले थे। मतलब समझो कि कुछ 2 घंटे से हम खा ही रहे थे। हाँ, पर साथ-साथ चाचा – चाची से बातचीत भी चल रही थी.