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Art installations at Dwijing Festival

किस्सा ए दानाई – बोडोलैंड ट्रॅवलॉग | पार्ट 1

अगर सिर्फ लिखने की ही बात है, तो हम अपने पैरों को पंख और आपके मन को पीस लिख सकते हैं! पर अभी हमारा मन ऐसा कुछ लिखने का नहीं है — अभी तो हमारे दिमाग में सिर्फ एक क़िस्सा ए दानाई ने घर बना रक्खा है। पर यह क़िस्सा शुरू करने से पहले आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि क़िस्सा ए दानाई आख़िर है क्या बला! तो कान लगा के ध्यान से देखिएगा – क़िस्सा ए दानाई में दो वर्ड्स हैं, पहला क़िस्सा, जिसका माने है किस्सा, कहानी या वृतांत; और दूसरा वर्ड है दानाई, जिसका मतलब होता है विज़डम! तो जी, इस बोडोलैंड वाली ट्रिप पर जिस विज़डम से हम जिए, ये उसी की बात है – क़िस्सा ए दानाई।

वैसे ये क़िस्सा ए दानाई सुनते सुनते आपका इस बात पर हमें लताड़ने का मन कर सकता है कि हमारी लैंग्वेज प्योर और पारिवारिक क्यों नहीं है! हम बस इतना कहेंगे कि जिस दिन राजश्री प्रोडक्शन वाले अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट या डायलॉग हम से लिखवाने लगेंगे, उस दिन हम वो भी कर लेंगे। अब इससे पहले कि हम शूर्पनखा की तरह हांडते – हांडते, राम और लक्ष्मण पर फ़िदा हो कर अपनी नाक कटवा लें, हम अपने क़िस्सा ए दानाई पर आ जाते हैं।

Cannabis Fields in India

डिकोडिंग चार सौ बीसी – व्हाट इज़ दिस ‘फ़ोर ट्वेंटी’ थिंग आफ्टर ऑल!

आज भी हर साल की तरह अप्रैल की बीसवीं तारीख है और दुनिया भर की चरसी-गंजेरी-भंगेड़ी जमात अपने अपने सोशल मीडिया पर इसकी ईद मनाते दिख रहे हैं. अब क्योंकि हमने भी दुनिया में कहीं भी, कभी भी प्रकृति की इस देन को संस्कृति का कानूनी हिस्सा बनाने की क्रांति करने में लगे बन्दे की सरकार बनाने में अपना दो कौड़ी का योगदान करने की पब्लिक घोषणा कर दी है, तो ये आइडिया आया कि एक बार चार इस चार सौ बीसी के बारे में भी बातचीत करते चलें!

Bodoland Territorial Region

Bodoland: An Epitome of Human Persistence

We got to know and experience the raw stories and unadulterated beauty of Bodoland, thanks to the Ambassadors of Bodoland program by Bodoland Tourism. We were hosted by Rootbridge Foundation on this 8-day extravaganza in ever-awesome Assam! Apart from the other stories that we had gathered, we also got to have some sense of what(s), why(s) and a couple of other questions! Let’s begin!

Notification to register drones in India

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की नई नोटिफ़िकेशन, ड्रोन्स रजिस्टर करना हुआ मेंडटरी

याद रखने वाली बात ये है कि इस डेडलाइन के अलावा अभी कोई और इनफार्मेशन नहीं है। 31 जनवरी 2020 के बाद आप अपने ड्रोन्स रजिस्टर कर सकते हैं या नहीं, इसकी जानकारी हमें अभी नहीं मिली। तो बस, यही सब बात है। आज हम भी अपने उड़नखटोले रजिस्टर कर लेंगे। आप भी देख लो, आपको कब करना है।

A goor is the messangers of

क्या जीसस और हिमालय के एंशिएंट ट्राइब्स रिलेटेड हैं?

इंटर कल्चरल कम्पेरिज़न्स में इस तरह की मिलती जुलती बातें सामने आना कोई नई बात नहीं है। एक जिज्ञासु होने के नाते वैसे भी हम सबके मन मे ऐसे बहुत से सवाल उठते रहते हैं। यह भी अभी एक नया विचार है, एक ऐसा विचार, जिससे रैडिकल सोच वाले लोगों को असहमति भी हो सकती है। लेकिन, यह हिमालय और अन्य संस्कृतियों के डिफरेंट आस्पेक्ट्स की स्टडीज़ को एक अलग डायरेक्शन दे सकता है। नड़ और गूर कम्युनिटी के बारे मे ऐसी कई बातें हैं जिनपर अगर गौर किया जाए, तो हमें अपनी हिस्ट्री और कल्चर से जुड़े बहुत से सवालों के जवाब मिल सकते हैं। बस हमें यह ध्यान रखना होगा कि हिमालय की इन ट्रेडिशंस को रेस्पेक्टफुली प्रिज़र्व किया जाए।

The temple of Malana Village

मलाणा गाँव – मिथ, पॉपुलिज़्म या बकैती?

अब आप इस गाँव में रात में नहीं रुक सकते – ऑफिशियली! गाँव के शाशन तंत्र ने ऐलान किया है, अपने प्यारे जमलू ऋषि के नाम पर! वैसे ये अच्छा ही है – कुछ तो बकैती कम हुई. धंधा वैसे बराबर ही चल रहा होगा! ऐसी सेंसिटिव जियोग्राफी में इतने सारे लोगों को इतना ज़्यादा टाइम स्पेंड करना कहीं से भी सही नहीं था. टूरिज़्म इंड्यूस्ड कूड़ा भी बढ़ ही रहा था. खैर, आप ही डिसाइड करिए कि ये मिथ है या पॉपुलिज़्म या बकैती!

Sunrise in Majul by Brahmaputra River

नार्थईस्ट भारत से पहली मुलाकात – पार्ट 1

बहुत से लोग, संस्थाएं और सरकार इसे बचाने की कोशिश में लगे हैं। पर, माजुली को बचाने के लिए अभी तक जितने भी प्रयास किये गए हैं, कुछ ज्यादा सफल नहीं रहे। जरुरत है कि ज्यादा से ज्यादा लोग माजुली पहुँचे और लिखकर, मूवी बनाकर या किसी भी तरीके से माजुली पर मंडराते खतरे के बारे में लोगों को बताएं। सरकार और संस्थाओं के साथ-साथ लोगों का साथ ज्यादा जरुरी है, नहीं तो माजुली नक़्शे से ही गायब हो जाएगा।

सियाचिन ग्लेशियर – दुनिया के सबसे ऊँचे बैटल फ़ील्ड में टूरिज़्म के फ़ायदे और नुकसान

जो सियाचिन देखने के सपने देखते थे, उनसे लेकर जो बस सियाचिन को देश प्रेम झाड़ने का ज़रिया मानते हैं, उन तक — कल शाम से सियाचिन जाने के कितने सपने सजते चले गए. साथ ही, हर मुद्दे और पहल पर डिबेट करने का राष्ट्रीय रोज़गार भी शुरू हो गया – कितना सही है, कितना गलत है से लेकर ग्लोबल वार्मिंग के असर तक – इतना ज्ञान पेला जा रहा है कि हमने सोचा कि चलो थोड़ा पढ़ा जाए और जाना जाए कि आखिर सीन है क्या सियाचिन का. तो सबसे पहले ये पता किया गया कि सियाचिन है क्या, कहाँ है, क्यों है और फिर ये सारा बवाल समझ आया. तो जो हमारी समझ में आया, वही आपसे शेयर कर रहे हैं।

Homestays In Himalaya | Part 1 | Bawray Banjaray Exclusive

कुछ रोज़ पहले बातल वाले चाचा चाची और हमारी कुछ बातें आप लोगों के साथ शेयर की थी। उन के साथ एक फोटो भी है जिसमें हम और चाचा चाची साथ में है। उस फोटो को देख के पता नहीं कैसे पर विनुता जोरापुर एकदम सही पकड़ लिए, कि जब […]

Root Bridge of Meghalaya

Trek To The Double Decker Living Root Bridges Of Meghalaya – 6000 सीढ़ियों वाली ट्रेक

वंडरलस्टर्स की बकेट लिस्ट्स में मेघालय अचानक से फेमस हो गया! बस पिछले तीन साल का टूरिस्ट काउंट और मेघालय के ऊपर बनाया गया कॉन्टेंट काउंट ही कम्पेयर किया जाए तो आपको इसका पता चल जाता है कि नार्थ ईस्ट इंडिया is a the new cool! इस ट्रेंड को सेट […]

Gandhi से बड़ा ट्रेवल इन्फ्लुएंसर कोई नहीं!

उदाहरण, इंस्पिरेशन, लर्निंग – सब बापू ही हैं!150वां हैप्पी बर्थडे है आज! देसी ट्रैकिंग स्टिक लेकर पूरा इंडिया ट्रेक किएला है भाई बाप ने! और घूम घूम कर ही, क्या उधम मचाया! गांधी की यात्राओं में आपको सेल्फ़ एस्टीम का टूटना, बेसिक सवाल पूछना, गलत और सही को नई समझ देना, एक इन्फ्लुएंसर होना और ऐसी कई चीज़ें मिल जाएंगी जो अपनी यात्राओं पर हम आप भी एक्सपीरियंस करते हैं.
हमारे लिए तो बापू #travelgoals में आते हैं.
घूमो तो ऐसा घूमो!

Tribes of Himalaya

देव भूमि हिमाचल के देवता – सामुदायिक रहन सहन का सबसे बेहतरीन धार्मिक उदहारण

मज़ेदार ये है कि ये सभी देवता अपने गावों में ज़िंदा ऋषियों की तरह पूजे जाते हैं. मतलब अपने फॉलोवर्स के लिए ये देवता सोने, जागने, खाने, नाचने और हमारी आपकी तरह नेचर को एन्जॉय करने जैसे सारे काम करते हैं. ये गुस्सा भी होते हैं, नाराज़ भी होते हैं और कभी कभी तो भक्त अपने देवताओं से परिहास भी करते हैं.

Experiencing the vibrant colors at Hornbill is among the best things to do in Nagaland

GUIDE TO HORNBILL FESTIVAL 2019 – PHOTO BLOG AND ALL YOU NEED TO KNOW

Hornbill Festival 2019 – Dates & Hornbill Festival Tickets Like every year, Horbill Festival 2019 — a 10-day grand show of Naga Heritage and Culture starts on December 1 (Saturday) and will end on Monday, the 10th of December. The tickets are available at the counters set up near the […]

Chacha Chachi With BAwray Banjaray

Chaacha – Chaachi Of Spiti Valley | बोध दोरजी और उनकी धर्मपत्नी चंद्रा

हम बात कर रहे हैं बातल के चंद्रा ढाबा के मालिक और स्पिति जाने वाले यायावरों के चहेते – चाचा बोध दोरजी और उनकी धर्मपत्नी चंद्रा की। हम 4 लोगों ने मिल के खूब अंडे और परांठे पेले थे। मतलब समझो कि कुछ 2 घंटे से हम खा ही रहे थे। हाँ, पर साथ-साथ चाचा – चाची से बातचीत भी चल रही थी.

BAwray Banjaray camps in Sohra

Camping In Sohra – आपके सामने रात की रहनुमाई में एक दूसरा देश दिखेगा

आपका जाना हुआ, तो आप यहाँ टेंट लगा सकते हैं – दूर से ही आपको बांग्लादेश व्यू पॉइंट का बोर्ड दिख जाएगा. ध्यान रहे कि यह कोई डेजिग्नटेड जगह नहीं है कैंपिंग के लिए, तो हो सकता है कि कभी प्रशासन आकर आपको यहाँ से जाने के लिए कहे.

Cattles grazing in the Shangarh Meadow

Shangarh – The Picnic Land Of Kullavi Mythology

Sainj Valley – the sister of Tirthan Valley in the Kullu District of Himachal Pradesh has gradually been able to make it to the listicles manufactured for wanderlusters. That it lacks a main river stream flowing by the settlements and villages had been one of the reasons behind keeping the […]

Bawray Banjaray on trek in the Himalayas

रेस्पोंसिबल ट्रेकिंग – क्या आप एक ज़िम्मेदार ट्रेकर हैं?

बर्फ़ गई और समय आ गया है पिछले साथ-आठ महीनों से बंद पड़े रस्ते, रोड्स, ट्रेल्स और ट्रेक्स के खुलने का. चटक धूप खिली है और सफ़ेद पाउडर का सूरज और चाँद के साथ नैन-मटक्का भी शुरू हो गया है. बर्फ़ भी उम्मीद से ज़्यादा मिली है, सो उसका भी […]