bawray Banjaray at Dal Lake in Srinagar

Indian Rivers And Water Bodies We Have Been To – Bawray Banjaray Photo Blog

कभी कभी लगता है कि कितना अजीब होता होगा न पानी बनना? पहले पिघलना है , भाप बनकर आसमानों में टिक जाना है या कहीं किसी कोने में जम कर बैठ जाना है फ़िर से पिघलने के लिए — ये चुन पाना ही कम है क्या? अपने जीवन चक्र में रमे हम Le Ladakh की फ़ोटो और वीडियो के लिए कम्प्यूटर पर जगह बनाने बैठे। कुछ 5 TB डेटा में से ये बता पाना कि क्या रखना है क्या नहीं रखना है एक बेहद ही कुतार्किक, बेफ़ज़ूल और दिमाग खराब करने वाली प्रक्रिया है और आजकल हम इस प्रक्रिया से निरंतर गुज़र रहे हैं – गुज़र क्या, बह रहे हैं. यादों के नदी में. कितना कुछ है जो बहने की जगह भागने के चक्कर में देखा ही नहीं गया. तो हमने सब देख डाला। एक एक कोना और एक एक फ़ोटो, और जो सबसे पहला कलेक्शन बन कर तैयार हुआ है उसका नाम रखा गया है – Bawray Banjaray Photo Blog On Rivers And Water Bodies Of India.

धरती, आकाश, जल और आग – हवा के अलावा पांच तत्वों में से सब कुछ है हमारी हार्ड ड्राइव में, पर शुरुआत जल से कर रहे हैं. तस्वीरें देखिए:

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Liddar River Kashmir
लिड्डर नदी, पहलगाम जम्मू कश्मीर – 2017

चंद्र ताल की वो ठंडी रात जब मिल्की वे के फ़ोटो लेने के लिए आधी रात को झील के किनारे बैठ के बिना हिले कैमरा चलाना पड़ा…

Chandra Taal is a crecent lake in Himachal Pradesh
चंद्रताल वाली सुबह, लाहौल वैली, हिमाचल प्रदेश, 2017

या फिर सुबह टेंट खोलते ही पैंगोंग की नमकीन खुशबू, जो एक बार ज़हन में बस जाती है न, तो फ़िर ताउम्र साथ ही रहती है।

Pangong lake ladakh
पेंगोंग लेक, लद्दाख , जम्मू कश्मीर, 2019

एक तरफ़ पार्वती के गर्म पानी के सोतो में पड़े पड़े दिन यूँ ही गुजार देना हो या डल लेक पर बैठे सही और गलत के अंतर को धूसर होते हुए देखना – इन नदियों और झीलों ने हमें ये समझना सिखाया है कि श्वेत और श्याम के बीच कई और रंग होते हैं जिनकी हम आम तौर पर परवाह किए बिना बस अपने अपने सफ़ेद और काले हिस्से ढूंढते रहते हैं.

Bawray Banjaray at Dal Lake in Srinagar
किनारे से बहुत दूर, ब्लैक एंड वाइट के बीच और भी कई रंग हैं!
डल लेक, 2017

किशनसर – विशनसर के किनारे एक टापू पर टेंट लगाकर एक झील के पानी को दूसरे में बहते हुए देखना एक बेहतरीन कविता सुनने जैसा है. कविता से याद आई, हमारी जयपुर की एक दोस्त, जॉली डिसूजा की लिखी एक कविता का. जॉली घूमती हैं, और अपनी कविताओं में जीवन का ज्ञान बांटती हैं. हुआ यूँ कि गुलज़ार साहब के जन्मदिन पर जॉली से बात करते करते हम जॉन, दाग़, मज़ाज़, ग़ालिब और मीर से होते हुए हिमालय पर आ पहुंचे और जिक्र आया पैंगोंग लेक का। हम पूछ बैठे – “कोई कविता इन झीलों, नदियों, झरनों पर भी हो तो पढ़ाइये। “

जॉली ने भी फट हमारे इनबॉक्स में ये चिपका दिया, पढ़िए:

Bawray Banjaray at Kishansar Vishansar Lake
विशनसर का पानी किशनसर में और फिर किशनसर का पानी?
किशनसर – विशनसर लेक, 2018
 नदी बहाव नहीं ठुकराती न!
ना हर जगह एक,
न एक जगह का पानी एक!
एक लम्हे एक जगह हम जिस पानी को देखते हैं ,
हमारी नज़र पड़ते पड़ते ,
वो पानी बदल जाता है --
जैसे रौशनी,जैसे तारे!

वक़्त जैसे मायने ही नहीं रखता,
खत्म हो जाता है समय उसके आगे,
हर लम्हा पूरा होकर भी
हर लम्हा खत्म --
ऐसे ही तो जीना होता है न!

कल आज और कल ,
कुछ मायने नहीं किसी के,
खुद में रहकर भी
हर पल नया बहाव ही तो रखना होता है ना हमें भी --
हमारा पानी, हमारी साँसे हो जैसे !

हर लम्हा जी लें,
पूरा और खत्म करके,
तो जाने कितने जीवन जी लें एक में --
खामोश वीराने में भी और दुनियावी आडम्बर में भी!

कभी शांत, कभी अल्हड़,
बस ख़ुद में बहना ही तो होता है!
नदी बहाव नही ठुकराती न --
इसलिए हर पल नयी होती जाती है,
बहने देती है खुद में हर लम्हें नया जीवन!
नदी बहाव नहीं ठुकराती है!

— जॉली डी’सूजा

Confluence of Spiti and Pin River
बहने देती है खुद में हर लम्हें नया जीवन — नदी बहाव नहीं ठुकराती है !
स्पीति नदी, 2017

चेक आउट आवर गाइड टू विलेजेज़ ऑफ़ स्पीति वैली

जब कविता ठीक से की गई हो तो उसे सिर्फ पढ़ा नहीं जाना चाहिए, बांटना भी चाहिए और उसके जवाब में एक और कविता कहनी चाहिए – आखिर बहना ही तो है! तो जॉली की कविता के जवाब में पेश-ए-ख़िदमत है हमारी लेखनी का बहाव – उन सभी नदियों और झीलों जिन्होंने यूँ ही बस बहते बहते हमारा वक़्त बांटा है, उनको समर्पित!
तो आप यह कविता भी पढ़िए और एक झलक देखिए इन तस्वीरों को जिनमें से किसी एक की नदी में पैर डाल हम डूबते सूरज से कल की बाकी बातें और आगे बढ़ाने जा रहे है, तब तक ख़ुशामदीद.

Bawray Banjaray at a frozen Suraj Taal
सूरज ताल, हिमाचल प्रदेश
जून, 2019
ये पानी भी न,
घाटियों से परे
ऊँचे, काले-धूसर, भयानक
पहाड़ों के किसी कोने में
दुबक के बादल बना बैठा होगा
Bawray Banjaray at Shyok River Nubra
श्योक नदी, नुब्रा वैली की और
जून, 2019
सर्दियाँ उसे जमा देती  होंगी, 
बर्फ़ बना बना जलता होगा वो
विरह की ताप,
पिघल जाता होगा फिर पानी बन के!
Bawray Bajaray during sunset at Parashar Lake in HImachal Pradesh
पराशर लेक, हिमाचल प्रदेश
मई, 2016
किसी नदी सा उद्दंड
सुस्ता लेता होगा किसी झील में
या फांदता होगा पहाड़ किसी झरने से
!
Bawray Banjaray at darrang Umgot River in Dwaki
दारंग उमगोट नदी, डॉकि
दिसंबर, 2018

आओ ज़रा हम भी बैठें
इन पहाड़ों में
पानी किनारे
और ख़ूब रोएं
और तब तक रोएं

जब तक कि
बुद्ध नहीं बन जाते!

मारी Rivers and Water Bodies of India कलेक्शन कैसी लगी, नीचे कमेंट सेक्शन में ज़रूर बाइयेगा। और हाँ, जॉली की तरह आपको भी अपनी बात हमसे शेयर करनी हों तो बेशक करें।
हमें पसंद आईं तो हम दूसरों को भी पढ़ाएंगे – जैसे आप अभी पढ़ रहे हैं.

इसके बाद, देखिए सैंज घाटी में शांघड वाले मैदान की सबसे ख़ूबसूरत तसवीरें

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